Saturday, June 22, 2024
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असम सरकार ने खोला खजाना, खेल क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च करेगी 1,000 करोड़ रुपये।

असम सरकार राज्य के विकास के लिए लगातार बड़े फैसले ले रही है। इस बीच असम सरकार ने राज्य के खेल क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार खेल क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास पर एक हजार करोड़ खर्च करेगी।

गुवाहाटी, एएनआइ। असम सरकार ने राज्य में खेल क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है। खेल और युवा कल्याण मंत्री, सांस्कृतिक मामलों के मंत्री बिमल बोरा ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी है। मंत्री बोरा ने कहा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली वर्तमान राज्य सरकार ने राज्य में खेल क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई उपाय किए हैं।

50 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा जिला स्तरीय खेल परिसर

मंत्री बिमल बोरा ने बताया कि राज्य में जिला स्तर पर दस खेल परिसरों का निर्माण किया जाएगा और प्रत्येक जिला स्तरीय खेल परिसर की लागत लगभग 50 करोड़ रुपये होगी। उन्होंने कहा इसके अलावा हमने 40 विधानसभा क्षेत्रों में एक बहुउद्देशीय स्टेडियम बनाने का फैसला किया है और प्रत्येक स्टेडियम की लागत लगभग 12 करोड़ रुपये होगी। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि निर्माण कार्य चल रहा है और सभी परियोजनाएं दो साल के भीतर पूरी हो जाएंगी।

सरकार ने लिया था बड़ा फैसला

इससे पहले असम सरकार ने राज्य में छह अल्पसंख्यक समुदायों को अल्पसंख्यक सर्टीफिकेट देने की घोषणा की थी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री केशब महंता ने बताया था कि मुस्लिमों, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों, जैन और पारसियों को यह सर्टीफिकेट प्रदान किए जाएंगे। मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया था कि असम की कैबिनेट ने अमृत सरोवर मिशन के एसओपी, एटीसीएल कर्मचारियों के पीएफ बकाए, ग्रीन टी लीव्स कर्मचारियों की टैक्स में छूट के फैसलों को मंजूरी दी है।

सीएम हिमंत बिस्वा ने सवाल पर मचा था हंगामा

बीते दिनों मुख्यमंत्री के मदरसा वाले बयान पर काफी बवाल हुआ था जब वह दिल्ली एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जब तक मदरसा शब्द रहेगा तब तक बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने के बारे में नहीं सोच पाएंगे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा ने कहा था ‘अगर आप उन्हें कहेंगे कि वे मदरसों में पढ़ेंगे तो डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बनेंगे, वे खुद जाने से मना कर देंगे।

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